- इंदौर, मध्य प्रदेश का स्वच्छता का प्रतीक शहर, आज जल प्रदूषण के कारण शर्मसार हो गया है। द हिंदू अखबार के संपादकी के अनुसार, नगर निगम के दूषित पानी से 10 से अधिक मौतें हो चुकी हैं और 2000 से ज्यादा लोग बीमार पड़े हैं ।
यह संकट शहरी स्वास्थ्य प्रबंधन की गहरी कमजोरियों को उजागर करता है, जहां स्मार्ट सिटी की चमक के पीछे बुनियादी सुविधाएं लंगड़ा रही हैं।घटना का विवरणइंदौर के विभिन्न इलाकों में पीने के पानी में क्लोरीन की कमी और बैक्टीरियल संक्रमण पाया गया। प्रभावितों में बच्चों और बुजुर्गों की संख्या अधिक है। एक अधिकारी को पद से हटा दिया गया, जबकि दो को निलंबित कर दिया गया ।
केंद्रीय टीम ने जांच शुरू की है, और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। साथ ही, प्रभावितों को मुफ्त इलाज का आदेश दिया गया ।
तीन सदस्यीय जांच समिति गठित हो चुकी है, जो जल स्रोतों और वितरण प्रक्रिया की पड़ताल करेगी।कारण और जिम्मेदारीमुख्य कारण जल उपचार संयंत्रों का अपर्याप्त रखरखाव, पाइपलाइनों का रिसाव और नियमित टेस्टिंग की अनदेखी हैं। इंदौर नगर निगम पर स्वच्छ भारत मिशन के तहत पुरस्कार जीतने का दबाव है, लेकिन बुनियादी निगरानी चूक गई। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के बाद जल स्रोत प्रदूषित हो जाते हैं, लेकिन फिल्टरेशन सिस्टम फेल हो गया।
क्या यह सरकारी लापरवाही है या संसाधनों की कमी? प्रशासन की प्रतिक्रिया देर से आई, जिससे जानें गईं।व्यापक प्रभावयह घटना केवल इंदौर तक सीमित नहीं। दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों में भी समान संकट दोहराए जाते हैं। जल जीवन मिशन के बावजूद, ग्रामीण-शहरी जल प्रबंधन में असमानता बनी हुई है। सामाजिक रूप से, गरीब तबके सबसे प्रभावित। पर्यावरणीय दृष्टि से, नदियों का प्रदूषण बढ़ रहा है।

