भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच 27 जनवरी 2026 को हस्ताक्षरित ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है। यह 20 वर्षों की लंबी वार्ताओं का परिणाम है, जो वैश्विक व्यापार व्यवस्था में भू-आर्थिक बदलाव का संकेत देता है। लेकिन क्या यह समझौता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के लिए चुनौती है? ट्रंप के आक्रामक टैरिफ और अलगाववाद के बीच यह डील भारत-यूरोप को मजबूत कर रही है, जो अमेरिकी प्रभाव को कमजोर कर सकता है.
कैसे यह समझौता ट्रंप के लिए परेशानी पैदा कर सकता है, भारत के दृष्टिकोण से।
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समझौते की मुख्य विशेषताएं
यह FTA दो अरब लोगों के बाजार को जोड़ता है, जो वैश्विक जीडीपी का एक चौथाई है। ईयू के अधिकांश निर्यात पर शुल्क समाप्त या काफी कम हो जाएगा – मशीनरी, रसायन, फार्मास्यूटिकल्स पर लगभग शून्य। ऑटोमोबाइल्स पर धीरे-धीरे 10% तक, 2.5 लाख वाहनों की कोटा के साथ। वाइन, स्पिरिट्स पर 20-30% और फलों के रस पर शून्य शुल्क। भारत को वित्तीय, समुद्री सेवाओं में पहुंच मिलेगी, जबकि ईयू को कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धी लाभ। सुरक्षा-रक्षा साझेदारी भी शुरू हुई, जापान-कोरिया जैसी। यूरोपीय आयोग अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे ‘सबसे ऊंचा पहुंच’ बताया.
वार्ता 2007 में शुरू हुई, लेकिन 2022 के यूक्रेन संकट और ट्रंप के टैरिफ ने गति दी। यह डील $474 अरब के कर्तव्यों को बचाएगी।
ट्रंप की व्यापार नीति: आक्रामक टैरिफ का दौर
ट्रंप का दूसरा कार्यकाल ‘अमेरिका फर्स्ट’ पर केंद्रित है। भारत पर 50% टैरिफ लगाए – रूसी तेल खरीद के कारण। यूरोप पर ग्रीनलैंड विवाद से 10-25% टैरिफ धमकी। दिसंबर 2025 के राष्ट्रीय सुरक्षा दस्तावेज में बहुपक्षीय व्यवस्था को त्यागा।
भारत-अमेरिका व्यापार $190 अरब है, लेकिन असंतुलन – भारत का निर्यात $80 अरब। ट्रंप दालों, ज्वेलरी पर दबाव बनाते हैं। दिसंबर 2025 में दालों पर भारत के 30% टैरिफ से अमेरिकी सीनेटर जयशंकर से मिले।
ट्रंप के लिए खतरे: आर्थिक और सामरिक चुनौतियां
1. आर्थिक नुकसान: ईयू-भारत सप्लाई चेन मजबूत होंगी। भारत लेबर-इंटेंसिव गुड्स (कपड़े, ज्वेलरी) ईयू भेजेगा, जहां ट्रंप टैरिफ हैं। ईयू कंपनियां (6000 भारत में) भारत शिफ्ट करेंगी, अमेरिकी बाजार खो देंगे। $27 ट्रिलियन बाजार बनेगा।
ट्रंप के सलाहकार स्कॉट बेसेन्ट: ‘यूरोप ने भारत से डील की, जबकि हमने 25% टैरिफ लगाए।’ भारत रूस तेल जारी रखेगा, ईयू के साथ विविधीकरण।
2. सामरिक अलगाव: ट्रंप यूरोप को ग्रीनलैंड पर दबा रहे, लेकिन ईयू भारत के साथ रक्षा साझेदारी बना रहा। नाटो तनाव बढ़ेगा। भारत QUAD में रहते हुए ईयू-रूस संतुलन करेगा
3. वैश्विक छवि: ट्रंप को ‘अनप्रेडिक्टेबल’ दिखेगा। ईयू ‘ट्रंप टैरिफ से बचाव’ बता रहा। भारत मोदी की कूटनीति से फायदा – ट्रंप को जवाब
भारत के फायदे: ट्रंप के बीच रणनीति
मोदी ने कहा: ‘वैश्विक व्यवस्था में स्थिरता।’ डील आत्मनिर्भरता बढ़ाएगी – PLI स्कीम मजबूत। 6000 यूरोपीय फर्म्स निवेश लाएंगी

