ट्रंप का ग्रीनलैंड पर यू-टर्न: दावोस में टैरिफ धमकी से बातचीत की ओर, आर्कटिक का नया खेल

डोनाल्ड ट्रंप ने दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के भाषण में ग्रीनलैंड हासिल करने के लिए सैन्य बल के इस्तेमाल से पीछे हटने का संकेत दिया, जिससे यूरोपीय देशों और नाटो सदस्यों को राहत मिली। उन्होंने आठ यूरोपीय देशों पर फरवरी 1 से 10% टैरिफ लगाने की धमकी दी थी, जो जून 1 से 25% हो जाती, जब तक ग्रीनलैंड सौदा न हो। दावोस भाषण के बाद फोकस “ग्रीनलैंड और पूरे आर्कटिक क्षेत्र” के लिए लंबी अवधि के सौदे पर शिफ्ट हो गया।

ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिकी सुरक्षा के लिए जरूरी बताया, इसे “उत्तर अमेरिका का हिस्सा” करार दिया और डेनमार्क की रक्षा क्षमता की आलोचना की। उन्होंने तत्काल चर्चाओं की घोषणा की और टैरिफ को स्थगित कर दिया। यूरोप पर हमला करते हुए कनाडा, फ्रांस और स्विट्जरलैंड जैसे सहयोगियों को निशाना बनाया।

टैरिफ नाटो सहयोगियों पर थे जो डेनमार्क का साथ दे रहे थे। ईयू ने एंटी-कोर्सियन इंस्ट्रूमेंट सक्रिय करने की तैयारी की, जो अमेरिकी टेक फर्मों को निशाना बनाता। ट्रंप के पीछे हटने से टकराव रुका

ट्रंप ने $175 अरब के गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस प्लान को ग्रीनलैंड से जोड़ा, जो इजरायल की तरह चीनी-रूसी खतरों से लड़ेगा। ग्रीनलैंड की स्थिति स्पेस वेपन्स के लिए आदर्श है।

यह वेनेजुएला में निकोलस मादुरो के अपहरण के बाद आया, जहां अमेरिका ने तेल सौदे हासिल किए। ट्रंप ने कोलंबिया, क्यूबा, ईरान और मैक्सिको पर भी इशारा किया।

दावोस में बातचीत से पता चला कि ग्रीनलैंड विवाद से कहीं गहरा संकट “नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था” के धीरे-धीरे ढहने का है। कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्ने ने वैश्विक व्यापार, वित्तीय प्रणाली, प्रवास और जलवायु नीतियों में खराबी की ओर इशारा किया। उन्होंने चेतावनी दी कि महाशक्तियां आर्थिक एकीकरण, टैरिफ, वित्तीय ढांचे और सप्लाई चेन को हथियार बना रही हैं, जबकि मध्यम शक्तियों को “समझौता करने” से बचना चाहिए क्योंकि यह सुरक्षा नहीं दिलाएगा। भारत जैसे देशों को कानून की प्रधानता पर विचार करना चाहिए।

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