WHO से अमेरिका की वापसी: वैश्विक स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा
एक महत्वपूर्ण सबक : “जब तक हर कोई सुरक्षित नहीं है, तब तक कोई भी सुरक्षित नहीं है”
U.S.A राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से अमेरिका को हटाने का फैसला, पक्षपात के आरोपों के आधार पर, न केवल हैरान करने वाला बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय के लिए गहरी चिंता का विषय है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस कदम को वापस नहीं लिया गया या पुनर्विचार नहीं किया गया, तो यह “तितली प्रभाव” (एक जटिल प्रणाली में छोटे बदलावों से उत्पन्न होने वाले अप्रत्याशित और दूरगामी परिणामों की श्रृंखला) को जन्म दे सकता है ।
अपने शपथ ग्रहण के तुरंत बाद, राष्ट्रपति ट्रंप ने WHO से अमेरिका की सदस्यता समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। अपने शुरुआती आदेशों पर हस्ताक्षर करते हुए उन्होंने, चुनौतीपूर्ण भाषा में, कहा, “विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हमें ठगा है।” इसके परिणामस्वरूप, अमेरिका 12 महीनों के भीतर संयुक्त राष्ट्र की इस स्वास्थ्य एजेंसी से औपचारिक रूप से बाहर हो जाएगा और साथ ही वित्तीय योगदान को भी बंद कर दिया जाएगा।
राष्ट्रपति ट्रंप ने WHO पर COVID-19 महामारी को गलत तरीके से संभालने और चीन के पक्ष में झुकाव रखने का आरोप लगाया, जबकि अमेरिका इसके लिए सबसे बड़ा वित्तीय योगदानकर्ता है। यह निर्णय पूरी तरह से अप्रत्याशित नहीं है; अपने पिछले कार्यकाल के दौरान, उन्होंने ने WHO की बार-बार आलोचना की थी, यह कहते हुए कि यह संगठन धीमी गति से कार्य करता है और चीन के नियंत्रण में है। 2020 में, उन्होंने WHO को फंडिंग रोकने की कोशिश की थी, लेकिन उनका कार्यकाल समाप्त होने के कारण यह प्रयास विफल हो गया था।
अमेरिका का यह कदम अत्यंत गंभीर विषय है क्योंकि अमेरिका WHO का संस्थापक सदस्य और सबसे बड़ा वित्तीय सहयोगी होने के नाते, अमेरिका इसके कुल फंड का लगभग 18% योगदान करता है। इस फंडिंग का रुकना वैश्विक स्वास्थ्य कार्यक्रमों, जैसे HIV/AIDS, तपेदिक और संक्रामक रोगों को खत्म करने के प्रयासों, पर गंभीर प्रभाव डालेगी। WHO जीवनरक्षक दवाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित करने, स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करने, और रोग प्रकोपों का पता लगाने व उन्हें रोकने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
यदि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप अपनी व्यक्तिगत नाराजगी को अलग रख सकें, तो उन्हें यह समझ आ सकता है कि वैश्विक स्वास्थ्य आपस में गहराई से जुड़ा हुआ है और कोई भी देश अपनी सीमाओं या अलगाव के माध्यम से रोगजनकों से खुद को पूरी तरह सुरक्षित नहीं रख सकता।
COVID-19 महामारी ने एक महत्वपूर्ण सबक सिखाया है: जब तक हर कोई सुरक्षित नहीं है, तब तक कोई भी सुरक्षित नहीं है। महामारी का मुकाबला करने के लिए राष्ट्रों के बीच सहयोग, डेटा साझा करना और तकनीकी आदान-प्रदान आवश्यक हैं। WHO ने अमेरिका से अपील की है कि वह अपने निर्णय पर पुनर्विचार करे और फिर से संगठन के साथ जुड़ जाए। भले ही यह असंभव लग सकता है, वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय को अभी भी विश्वास है कि अमेरिका को WHO के साथ वापस लाएगा।
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