ट्रंप अलगाववाद: भारत की अर्थव्यवस्था पर 5 बड़े झटके

ट्रंप प्रशासन के अलगाववाद से भारत के लिए तात्कालिक आर्थिक निहितार्थ व्यापार प्रतिबंधों, वीजा पाबंदियों और निवेश धीमेपन के रूप में उभर रहे हैं। रूसी तेल खरीद पर 500% शुल्क की धमकी से ऊर्जा आयात महंगा हो सकता है, जबकि आईटी निर्यात प्रभावित। यूएस निकास जलवायु फंडों से नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को धक्का लगेगा।

व्यापार और शुल्क दबाव

ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने पर भारत को 500% शुल्क लगाने की चेतावनी दी, जो ऊर्जा बिल बढ़ाकर मुद्रास्फीति को भड़का सकता है।द्विपक्षीय व्यापार सौदा रुका, H-1B वीजा सीमाओं से आईटी कंपनियों को 10-15% राजस्व हानि का अनुमान। भारत को यूरोपीय बाजारों की ओर रुख करने को मजबूर किया जा रहा।

जलवायु और नवीकरणीय ऊर्जा हानि

अमेरिका का ISA, IRENA और ग्रीन क्लाइमेट फंड से हटाव भारत के सौर लक्ष्यों को बाधित करेगा, $2-3 अरब फंडिंग गैप पैदा कर। यह स्वच्छ ऊर्जा निर्यात और तकनीक हस्तांतरण को प्रभावित करेगा, GDP वृद्धि पर 0.2-0.5% दबाव।

निवेश और रणनीतिक जड़ता

यूएस FDI धीमी, रक्षा सौदों पर असर से आपूर्ति श्रृंखला बाधित। “रणनीतिक जड़ता” से भारत को BRICS+ और यूरोप पर निर्भरता बढ़ानी पड़ेगी, निर्यात विविधीकरण जरूरी। कुल मिलाकर, 2026 GDP वृद्धि 0.5-1% कम हो सकती है।

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