SIR विवाद पर कांग्रेस का CEC पर MODI आरोप, Election Commission और voter list की तस्वीर

SIR विवाद में कांग्रेस ने CEC ज्ञानेश कुमार पर लगाए गंभीर आरोप। जानिए क्या है SIR ?

SIR विवाद: कांग्रेस ने CEC पर लगाया आरोप, चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर उठे सवाल

नई दिल्ली | 25 सितंबर 2026

भारत में मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए SIR को लेकर इस्तेमाल किए जा रहे तरीके पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि CEC द्वारा अपनाई जा रही प्रक्रिया को “Method of Disenfranchising Indians (MODI)” कहा जा सकता है। यह कांग्रेस का राजनीतिक आरोप और शब्द-प्रयोग है; इसे चुनाव आयोग द्वारा स्वीकार किया गया निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।

SIR क्या है और विवाद क्यों बढ़ा?

Special Intensive Revision (SIR) मतदाता सूची की व्यापक समीक्षा की प्रक्रिया है। चुनाव आयोग के अनुसार इसका उद्देश्य पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में शामिल करना, अपात्र नामों को हटाना और मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनाना है। बिहार में SIR की शुरुआत जून 2025 में हुई थी और बाद में इसे अन्य राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों तक विस्तारित किया गया।

मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में SIR की वैधानिकता को बरकरार रखा था। अदालत ने कहा था कि प्रक्रिया का उद्देश्य स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए मतदाता सूची को सही एवं विश्वसनीय बनाना है।

हालांकि, मतदाता नामों की जांच और हटाने की प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों तथा कुछ चुनाव अधिकारियों की आपत्तियों ने नए सवाल खड़े किए हैं।

कांग्रेस का क्या आरोप है?

कांग्रेस का कहना है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाता नामों को हटाने या चिन्हित करने से वास्तविक मतदाताओं के मतदान अधिकार पर असर पड़ सकता है।

जयराम रमेश ने दावा किया कि Gen Z यानी नए और युवा मतदाताओं के सामने भी नामांकन से जुड़ी कठिनाइयां पैदा हो सकती हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मतदाता सूची से जुड़े डिजिटल सिस्टम और Form 6 की प्रक्रिया में किए गए बदलावों से स्थानीय स्तर के अधिकारियों की भूमिका प्रभावित हुई है।

कांग्रेस ने इन आरोपों के आधार पर CEC के इस्तीफे की मांग भी की है।

चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की खबरों से विवाद और बढ़ा

SIR विवाद उस समय और गंभीर हुआ जब Indian Express की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर कम-से-कम 14 बार आपत्ति दर्ज की थी।

रिपोर्ट के अनुसार, इन आपत्तियों में मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने, Form 6 में बदलाव तथा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के केंद्रीकरण जैसे मुद्दे शामिल थे।

इन रिपोर्टों के बाद विपक्ष ने चुनाव आयोग की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग तेज कर दी।

चुनाव आयोग का पक्ष क्या है?

चुनाव आयोग ने इन आरोपों के जवाब में कहा कि आयोग के भीतर अलग-अलग विचार और सुझाव सामने आना संस्थागत deliberation का सामान्य हिस्सा है। आयोग के अनुसार SIR से जुड़े सभी आदेश कानूनी प्रावधानों और स्थापित प्रक्रियाओं के अनुरूप हैं।

ECI ने यह भी कहा कि आयोग के प्रत्येक अधिकारी को चुनाव प्रणाली में सुधार के लिए अपने सुझाव देने का अधिकार है और SIR से जुड़े निर्णयों को कानूनी आधार प्राप्त है।

इसलिए, फिलहाल कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों और चुनाव आयोग के आधिकारिक स्पष्टीकरण को अलग-अलग समझना महत्वपूर्ण है।

13 करोड़ से अधिक नामों पर क्यों है चर्चा?

SIR के राष्ट्रीय विस्तार के दौरान मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नामों की जांच हुई है। Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम प्रभावित हुए। इसमें मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थित या डुप्लीकेट प्रविष्टियों की जांच और अन्य कारण शामिल बताए गए हैं।

इस संख्या को सीधे “वोटरों को हटाना” मानना उचित नहीं होगा, क्योंकि चुनाव आयोग की प्रक्रिया में अलग-अलग श्रेणियों के नामों की जांच, आपत्ति और अपील की व्यवस्था भी शामिल है।

लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए आगे क्या महत्वपूर्ण है?

SIR विवाद में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि मतदाता सूची को साफ और विश्वसनीय बनाने की प्रक्रिया में किसी पात्र नागरिक का नाम गलती से न हटे और प्रत्येक प्रभावित व्यक्ति को पर्याप्त अवसर मिले।

पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़े मामले में चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हटाए गए लगभग 27.16 लाख मतदाताओं में से 22 लाख से अधिक ने अपील दायर की थी। यह दिखाता है कि नाम हटाए जाने के मामलों में पुनर्विचार और अपील की प्रक्रिया भी विवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

निष्कर्ष

SIR को लेकर मौजूदा विवाद केवल कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच राजनीतिक टकराव नहीं है, बल्कि यह मतदाता सूची की शुद्धता, पात्र नागरिकों के मतदान अधिकार, प्रशासनिक पारदर्शिता और चुनावी प्रक्रिया में भरोसे से जुड़ा मुद्दा है।

कांग्रेस ने CEC पर गंभीर आरोप लगाते हुए “Method of Disenfranchising Indians (MODI)” शब्द का इस्तेमाल किया है, जबकि चुनाव आयोग SIR को कानूनी प्रक्रिया बताते हुए अपने फैसलों का बचाव कर रहा है।

आगे इस विवाद का महत्व इस बात पर निर्भर करेगा कि मतदाता सूची में बदलाव कितने पारदर्शी तरीके से होते हैं, पात्र मतदाताओं को कितनी आसानी से अपील का अवसर मिलता है और चुनाव आयोग इन प्रक्रियाओं पर उठ रहे सवालों का किस तरह जवाब देता है।